लेखनी कहानी -01-Dec-2022

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किसी के कंगनों में खनखन नही है बस मेरी जिंदगी में सुलझन नही है तुमको भृम हुआ है बरसात देख के पतझड़ है गर्मी है यार सावन नही है भला कैसे ...

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